रेडबस की सफलता की कहानी RedBus Success Story

रेडबस की सफलता की कहानी

RedBus एक ऑनलाइन बस टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म है, जो गतिशील और कुशल ऑनलाइन बस टिकट बुकिंग प्रणाली प्रदान करके लाखों लोगों के लिए आरामदायक और सस्ती यात्रा की सुविधा देता है। यह Ibibo Group की सहाय्यक कंपनी है, जो पूरे भारत में यात्रियों को 2500 से अधिक बस ऑपरेटरों के नेटवर्क के साथ जोड़ता है।

वर्तमान में RedBus, भारत के अलावा मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, पेरू और कोलंबिया जैसो देशों में भी अपनी सुविधा प्रदान करते है। भारतीय ऑनलाइन बस टिकटिंग सेगमेंट में कंपनी की 70% हिस्सेदारी है।  

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रेडबस के पीछे का इतिहास

RedBus इस सफलता के पीछे संस्थापक फणींद्र समा, चरण पद्मराजू और सुधाकर पासुपूरी का बहुत बड़ा योगदान है। परंतु इसके पीछे का दिमाग फणींद्र समा का है, जो 8 साल तक रेडबस के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके है। बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद, तीनों ही संस्थापक बैंगलोर में अलग-अलग MNCs के लिए काम कर रहे थे। फणींद्र समा अक्सर अपने माता पिता से मिलने के लिए हैदराबाद जाया करते थे।

2005 की दीपावली के समय उनके सारे रूममेट छुट्टियां मनाने के लिए अपने अपने घर चले गए लेकिन हैदराबाद जाने वाली सभी बसों के टिकट बिकने के कारण उन्हें कोई टिकट नहीं मिल पाया और वह अपने घर नहीं जा पाए। इस घटना से फणींद्र इतने निराश हो गए की पूरा सप्ताह उन्होंने नाराजगी में ही बिता दिया और इस समस्या का समाधान ढूँढने की कोशिश करने लगे।

अगले पूरे सप्ताह फणींद्र कई ट्रैवल एजेंट से मिलें और उनसे बस टिकट की बुकिंग प्रोसेस और बस ऑपरेटर के काम के बारे में जानने के कोशिश की किंतु किसी भी एजेंट ने उन्हें इसके बारे में बताने से इन्कार किया पर जब वह एक युवा ट्रैवल एजेंट से मिले तो उन्हें यह जानकारी निकालने में सफलता मिलीं।

इससे उन्हें बस ऑपरेटरों और ट्रैवल एजेंटों के बीच सिस्टम और कम्युनिकेशन की अव्यवस्था का पता चला। उपलब्ध सीटों और टिकट की कीमत में भी कोई पारदर्शकता नहीं है, यह भी उन्हें ज्ञात हो गया। इस समस्या का समाधान ढूँढने के लिए फणींद्र समा ने चरण पद्मराजू और सुधाकर पासुपूरी के साथ मिलके मुफ्त में ड्राइवर और एजेंट के लिए रेडबस नाम से वेबसाइट बनाने की ठान ली।

रेडबस की स्थापना

शुरुआत में फणींद्र को प्रोग्रामिंग नहीं आती थी, पर जल्द ही उन्होंने बुक पढ़कर कोडिंग और प्रोग्रामिंग के बारे में सींख लिया। RedBus की शुरुआत अगस्त 2006 में केवल एक ऑपरेटर, 5 सीटों के साथ 5 लाख रुपये से हुई थी। जब ट्रेवल एजेंट ने उनके द्वारा बनाए गए इस प्लेटफार्म का उपयोग किया तब उनके टिकटों की बिक्री में काफी सुधार हुआ यह रेड बस के लिए बहुत बड़ी सफलता थी  क्योंकि इसे बिना पढ़े लिखे लोग भी यूज कर पाते थे।

रेडबस की इस सफलता को देख 2007 में उन्हें सीडफंड और अघोषित निवेशकों से $ 1 मिलियन (3 करोड़ रु.) के अपने पहले दौर की धनराशि प्राप्त हुई। इसके अलावा Inventus Capital, Seedfund, Helion Venture Partners और अन्य अनाम निवेशकों ने 2009 में, $ 2.5 मिलियन और 2011 में, $ 6.5 मिलियन फंड इस स्टार्टअप में जुटाया। जिसके चलते रेडबस ने बस उद्योग में एक क्रांति ला दी।

जब रेडबस को लॉन्च किया गया तब सोचा गया था कि 5 साल में केवल 100 बस ऑपरेटर की रजिस्ट्रेशन होगी पर इसकी सफलता इतनी तेजी से बढ़ी 1 साल के भीतर ही 400 रजिस्ट्रेशन हो गए थे।  आज Redbus 10,000 बसों, 700+ बस ऑपरेटरों के साथ एक ऑनलाइन बस टिकट बुकिंग कंपनी के रूप में सफलता के साथ आगे बढ़ रही है। वह 15 राज्यों में परिचालन कर रही है और रोजाना कम से कम 5,000 टिकट बेचती है। वह होटल, बस किराए और तीर्थयात्राओं के लिए भी अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है। 2013 में, रेडबस को दक्षिण अफ्रीका के Naspers की सहायक कंपनी Ibibo ग्रुप द्वारा $135 million में अधिग्रहित किया गया।

रेडबस के अचीवमेंट्स

फणींद्र Endeavour में शामिल होने वाले भारत के दूसरे उद्यमी बन गए।
व्यापार मानक से सबसे नवीन कंपनी का किताब।
ब्रांड ट्रस्ट रिपोर्ट से सबसे विश्वसनीय ब्रांड का किताब।
फणींद्र समा का 2014 में फॉर्च्यून इंडिया द्वारा “40 अंडर 40” के तहत सिलेक्शन।
फणींद्र को 10 नवंबर 2017 को TSIC (तेलंगाना स्टेट इनोवेशन सेल) के CIO (चीफ इनोवेटिव ऑफिसर) के रूप में नियुक्त किया गया।
फोर्ब्स पत्रिका द्वारा 2010 में टॉप 5 स्टार्टअप कंपनी में RedBus का नाम शामिल।

रेडबस की सफलता की कहानी उन तमाम युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिनाइयों का सामना करके जीवन में आगे बढ़ना चाहते है। इससे हमें सीख मिलती है कि, “शिक्षा बाधाओं की बेहतर समझ को प्रज्वलित करती है”।

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