राहुल यादव – भारतीय स्टार्टअप का बुरा लड़का | Rahul Yadav – The Bad Boy of Indian Startup |

राहुल यादव  Rahul Yadav

राहुल यादव एक भारतीय उद्यमी हैं, जिन्हें रियल एस्टेट सर्च पोर्टल हाउसिंग डॉट कॉम के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ के रूप में जाना जाता है। housing.com में अपने काम के लिए, राहुल को फोर्ब्स इंडिया युवा उद्यमियों की “30 अंडर 30” की सूची में शामिल किया गया था। उन्हें भारतीय स्टार्टअप्स का “Bad Boy” कहा जाता है। अपने उत्पाद कौशल के अलावा निवेशकों और मीडिया के साथ बर्ताव के लिए अक्सर उनकी तुलना Steve Jobs के साथ की जाती है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस में एक इंटरव्यू के दौरान “मैं सिर्फ 26 साल का हूँ और इतनी जल्दी पैसोँ के बारे में गंभीर होना नहीं चाहता” कह कर उन्होंने अपनी सभी 200 Crore रुपये की निजी इक्विटी housing.com के 2,251 कर्मचारी में वितरित कर दी। आज हम इस कहानी के माध्यम से भारत के सबसे लोकप्रसिद्ध उद्यमी Rahul Yadav के उत्थान और पतन के बारे में बात करेंगे और जानेंगे की कैसे उन्होंने हमेशा के लिए स्टार्टअप्स की इतिहास की किताबों में अपना नाम लिख दिया है।

 

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प्रारंभिक जीवन  Early Life

राहुल का जन्म 1989 में राजस्थान के खैरथल में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन से वह पढाई में बहुत अच्छे थे। 2007 में उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे में दाखिला लिया और धातु विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल की। राहुल ने विश्वविद्यालय के छात्र संघ के लिए एक प्रतिनिधि और सचिव के रूप में भी काम किया। बाद में उन्होंने ऑनलाइन प्रश्न बैंक exambaba.com का निर्माण किया, जो पुराने परीक्षा के प्रश्नपत्र का संच था। लेकिन जब विद्यालय को इसके बारे में पता चला, तब उन्होंने राहुल को इसे बंद करने के लिए कहा। इससे नाराज होकर राहुल ने इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में IIT बॉम्बे से पढ़ाई बंद कर दी। इसी दौरान उन्होंने प्रोग्रामिंग भी सीखी, जिसकी वजह से बाद में वह अलग अलग प्रकार की Google Application बनाने में सक्षम बन गए।

उस वक़्त राहुल अपने दोस्त अद्वित्य शर्मा के साथ अपनी इंजीनियरिंग छोड़कर रहने के लिए आवास की खोज करने लगे, जो उनके लिए बड़ा मुश्किल काम बन गया था। एक वक़्त ऐसा भी आया कि उन्हें मुंबई की सड़कों पर एक महीना बिताना पड़ा और आखिरकार एक लंबी और थका देने वाली खोज के बाद उन्हें IIT Bombay के पास ही एक अच्छा घर मिला। इसी दौरान उन्होंने देखा कि उनके दोस्तों का घर खोजनेवाले और भाड़े से देनेवाले संभावित ग्राहकों से एक अच्छा नेटवर्क बन गया था। जिस वजह वह लोग दलाल का काम करके थोड़े ही समय में 1 से 2 लाख प्रति माह कमा रहे थे। यह सब देखकर राहुल ने इसी क्षेत्र में खुद का कुछ नया करने का सोचा, लेकिन उनके पास अलग-अलग शहरों और राज्यों के व्यापक ज्ञान का अभाव होने के कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।

हाउसिंग डॉट कॉम के संस्थापक  housing.com Founder

इन्हीं समस्या का समाधान ढूंढने के लिए राहुल ने अपने ग्यारह अन्य सहपाठियों के साथ एक वेबसाइट बनाने का फैसला किया और 2012 में एक सुनियोजित मैप बेस्ड पोर्टल housing.co.in का निर्माण किया। बहुत ही कम समय में इस पोर्टल को काफी लोकप्रियता प्राप्त हुईकंपनी के इस विकास को देख सभी संस्थापकों ने अपनी सॉफ़्टवेयर नौकरियां छोड़ दीं और वह हाउसिंग डॉट कॉम के लिए पूरा समय काम करने लगे। जल्द ही कंपनी ने Network 18 के पूर्व सीईओ Haresh Chawla से 1.5 करोड़ और मार्च 2013 में Chaupaati Bazaar के सह-संस्थापक Zishaan Hayath से 50 लाख के फंडिंग के दो राउंड जुटाने में कामयाबी हासिल की।

हाउसिंग डॉट कॉम का उदय  Rise of housing.com

पहले नौ महीनों में कंपनी ने मुंबई बाजार के नेविगेशन सुविधाओं का मानचित्रण करने में फोकस किया, साथ ही स्थान आधारित दृष्टिकोण और खोज सुविधाओं को ठीक करने में भर दिया। housing.co.in के लॉन्च के बाद पहले कुछ हफ्तों में संस्थापकों ने ब्रोकरेज आधारित मॉडल पर काम किया, लेकिन बाद में विश्वसनीय ऐसे लिस्टिंग आधारित मॉडल का चयन किया गया। इस तरह की व्यापार रणनीति के साथ कंपनी ने पहले नौ महीनों में ही मुंबई बाजार में अपनी परिचालन लागत को तोड़ दिया और मई 2013 में, वे पहुंच प्रतिशत के मामले में Makaan.com और Indiaproperty.com से आगे निकल गए। कंपनी ने जून 2013 में, Nexus Venture Partners से USD $ 2.5 मिलियन और USD $ 3 मिलियन का अगले दौर का धन जुटाया।

इन फण्ड का इस्तेमाल करके कंपनी ने डेटा साइंस लैब बनाया। साथ ही चेन्नई, दिल्ली, नोएडा और हैदराबाद जैसे कुछ हाई-प्रोफाइल शहरों में विस्तार भी किया। कंपनी ने अब अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 700 तक कर दी थी और साइट पर भी हर दिन एक लाख यूनिक यूजर आ रहे थे। सितंबर 2013 में कंपनी ने निकट भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय उपयोगकर्ताओं को लक्षित करने के इरादे से USD $ 1 मिलियन में डोमेन नाम housing.com के साथ एक राष्ट्रीय संख्या, 03-333-333-333 को खरीदा।

हालाँकि जब सब कुछ राहुल यादव और हाउसिंग डॉट कॉम के लिए बहुत अच्छा लग रहा था। तभी चीजों में भारी बदलाव आया और भारत के सबसे आशाजनक स्टार्टअप का पतन शुरू हुआ। दिसंबर 2014 में राहुल जापानी कंपनी Softbank को 90 मिलियन डॉलर का निवेश करने के लिए मनाने में कामयाब रहे। इन निधियों का उपयोग करके कंपनी भारत के 300 शहरों में 40 मिलियन से अधिक घरों की मैपिंग करके बड़े पैमाने पर विकास की गति से आगे बढ़ा रही थी। 

हाउसिंग डॉट कॉम में समस्याएं  The Problems in Housing.com

इसी दौरान कंपनी ने आईआईटी और अन्य शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेज से 500 से अधिक लोगों को उच्च वेतन से रोजगार देना और विज्ञापन अभियानों पर भारी खर्च करना भी शुरू किया। उसी समय दुनिया की सबसे बड़ी वीसी फर्म Sequoia Capital के प्रबंध निदेशक Shailendra Singh ने कथित तौर पर एक हाउसिंग डॉट कॉम के कर्मचारी को नौकरी की पेशकश की थी। जिससे उकसावे में आकर राहुल ने सार्वजनिक रूप से शैलेन्द्र को एक धमकी देनेवाला ईमेल लिखा कि अगर उन्होंने कर्मचारी को ऐसे संदेश भेजना बंद नहीं किया तो वह उनकी सबसे अच्छी फर्म को खाली कर देंगे।

बाद में राहुल ने अपने कर्मचारियों को लिखे ईमेल में कहा है कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया था की कई बार ग्रुप housing.com को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। कंपनी के लिए यह बहुत कठिन समय था, सिकोइया कैपिटल ग्रुप ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजकर सौ करोड़ के हर्जाने की मांग की। यह सारी परिस्तिथियाँ देखकर निवेशकों ने भी जबरदस्ती कंपनी में शॉट्स बुलाकर राहुल की उदासीनता को दबाने की कोशिश की, जिस वजह से उन्हें एक नामी CEO की तरह महसूस होने लगा था।

हाउसिंग डॉट कॉम का पतन  Fall of housing.com

आखिरकार 2015 में निवेशकों के साथ उनकी निराशा अपने अंतिम चरम पर पहुंच गई और उन्होंने बोर्ड के सदस्यों को एक ईमेल लिखकर कंपनी छोड़ने की योजना बनाई। जिसपर निवेशकों ने कहा कि उनके द्वारा भेजे गए ईमेल में उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ भारी-भरकम शब्द का इस्तेमाल किया, जिसमें उन्होंने निवेशकों के साथ चर्चा के स्तर को दिखाया था। बाद में उसी महीने में राहुल यादव ने हाउसिंग डॉट कॉम में लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये की अपनी पूरी हिस्सेदारी कर्मचारियों में बांटने की घोषणा की। जिसपर उन्होंने कहा की, मै सिर्फ 26 साल का हूँ और जीवन में पैसे के बारे में इतनी जल्दी गंभीर होना नहीं चाहता। बाद में जुलाई 2015 में कंपनी में यह घोषणा की गई, कि housing.com के Co-Founder और Former CEO Rahul Yadav को फर्म से निकाल दिया गया है और अब किसी भी तरह से कंपनी से जुड़े नहीं रहेंगे।

राहुल यादव की वापसी  Comeback of Rahul Yadav

इतनी कई सारी बुरी घटनाओं के बावजूद भी राहुल निराश नहीं हुए या उन्हें प्रेरणा की कमी महसूस नहीं हुई। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ खड़े होने का फैसला किया और एक नए उद्यम की तैयारी शुरू की। हाल ही घटी सारी घटनाओं की श्रृंखला और नवीनतम प्रौद्योगिकी की गहरी समझ से सबक सीखते हुए, उन्होंने अगले कुछ महीनों में आगे बढ़ने का फैसला किया और डेटा एनालिटिक्स और विज़ुअलाइज़ेशन के क्षेत्र में एक नया उद्यम शुरू करने की घोषणा की। युवराज सिंह के साथ फ़्लिपकार्ट के संस्थापक सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने तुरंत ही उनके इस नए उपक्रम को फंडिंग भी किया।

हालांकि, राहुल के हाउसिंग डॉट कॉम को छोड़ने के बाद लाक्षणिक रूप से सभी 15 सदस्यीय टीम ने कंपनी को छोड़ दिया और केवल कुछ मुट्ठी भर टीम ने बुद्धिमान इंटरफेस की घोषणा की और उसे लॉन्च किया। राहुल यादव की कहानी बहुत सारे उद्यमियों को हतोत्साहित कर सकती है लेकिन इसे कई लोगों के लिए एक सबक के रूप में भी देखा जाना चाहिए। वर्तमान में उनके बारे में कोई चर्चा नहीं है, लेकिन हमें उम्मीद है कि वह फिर से मजबूत और बेहतर वापसी करेंगे। अंततः वह कहते है,

जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे लगता है कि चीजें अलग तरह से हो सकती थीं। मैं एक मशीन की तरह काम कर रहा था और बेहद तनाव में था। आज, मुझे लगता है कि मैं अधिक परिपक्व हूं और दुनिया को विभिन्न कोणों से देख रहा हूं। मैं फिलहाल 3-4 चीजों पर काम कर रहा हूं। मैं बहुत जल्द वापसी करूंगा।

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