रामदेव अग्रवाल सक्सेस स्टोरी – जीरो से 1400 करोड़ रुपये Raamdeo Agrawal Success Story – Zero to Rs 1400 Crore

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रामदेव अग्रवाल सक्सेस स्टोरी – जीरो से 1400 करोड़ तक का सफर

रामदेव अग्रवाल एक भारतीय व्यापारी और मोतीलाल ओसवाल समूह के जॉइंट एमडी और सह-संस्थापक हैं। इसके साथ ही वह एक प्रतिष्ठित शेयर बाजार निवेशक है, जिन्होंने जीरो से शुरुआत करके 1400 करोड़ से भी ज्यादा का पोर्टफोलियो बनाया है। मोतीलाल ओसवाल की लोकप्रिय वेल्थ क्रिएशन स्टडी रिपोर्ट के पीछे वैल्यू इन्वेस्टर रामदेव अग्रवाल का दिमाग है। उनके पास भविष्य के मल्टी-बैगर शेयरों की पहचान करने का अद्भुत कौशल है, जिसके आधार पर आज उन्होंने 1400 करोड़ से भी ज्यादा संपत्ति का निर्माण किया हैं। इसके अलावा मोतीलाल ओसवाल समूह में भी उनकी 36% हिस्सेदारी है। 

प्रारंभिक जीवन

रामदेव अग्रवाल मध्यमवर्गीय परिवार से थे। वह रायपुर छत्तीसगढ़ के एक दूरदराज के गांव में रहते थे जहां बिजली और उचित सड़कें भी नहीं थीं। नियमित शिक्षा पूरी करने के बाद, रामदेव अग्रवाल ने मुंबई में जाकर चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई करने का फैसला किया। चार्टर्ड अकाउंटेंसी के पूरा होने में पाँच साल लग गए। शेयर बाजार निवेश में उन्हें काफी रूचि थी और वह उसमे ही अपना करियर बनाना चाहते थे पर उन्हें कोई अवसर नहीं मिल रहा था।

रामदेव अग्रवाल के पास निवेश करने का ज्ञान तो था पर ना कोई जमा पूँजी थी और ना ही कोई ग्राहक थे। ऐसे वक़्त अपने अध्ययन के दौरान उनकी मुलाकात श्री मोतीलाल ओसवाल से हुई और उन्होंने अध्ययन पूरा होने के बाद उनके साथ पार्टनरशिप में स्टॉक मार्केट में प्रवेश करने का फैसला किया। उन्होंने 1987 में “मोतीलाल ओसवाल” सब-ब्रोकिंग फर्म की स्थापना की। आज यह छोटा सब-ब्रोकिंग फर्म एक बड़ी वित्तीय सेवा प्रदान करनेवाली कंपनी बन गया है।

शेयर बाजार यात्रा 

रामदेव अग्रवाल ने मोतीलाल ओसवाल नामक सब-ब्रोकिंग फर्म चलाने के साथ शेयर बाजार में निवेश करना भी शुरू किया। शुरूआती के कुछ साल उन्हें कुछ ज्यादा लाभ नहीं हुआ परन्तु 1990 से 1992 इन दो साल में हर्षद मेहता बुल रन के चलते उनकी 15-20 लाख की इन्वेस्टमेंट 30 करोड़ रुपये हो गई। 1994 उनकी मुलाकात Mr. Warren Buffet से हुई, उनसे रामदेव अग्रवाल को निवेश के बारे बहुत कुछ सिखने को मिला, जिससे उनका निवेश के बारे में सोचने का नजरियाँ ही बदल गया। उन्होंने Buffet के शेयर होल्डर को लिखे सारे पत्र पढ़ लिए और इसके बाद उनकी निवेश के  यात्रा की असली शुरुआत हुई।

Mr. Warren Buffet से मिलने के बाद उन्होंने अपना पूरे पोर्टफोलियो का पुनर्गठन किया और क्वालिटी स्टॉक पर ध्यान केंद्रित करना शुरु कीया। उन्होंने Hero Honda, Ajanta Pharma, Vysya Bank, Eichers Motors आदि जैसे कई शेयरों में कई गुना लाभ कमाया। 1997 में उन्होंने Hero Honda का स्टॉक Rs.30/- में ख़रीदा था जो 2016 में Rs.2600/- की कीमत पर बेच दिया और इन बीस सालों में उन्हें Hero Honda के एक शेयर के पीछे Rs.600/- का डिविडेंड भी मिला है। मोटरसाइकिल व्यवसाय में आगामी व्यवसाय के अवसर को देखते हुए उन्होंने हीरो होंडा स्टॉक में निवेश किया और वह उनके लिए पहला मल्टी-बैगर स्टॉक बन गया है।

रामदेव अग्रवाल की अगली पिक 1998 में इन्फोसिस थी जहां उन्हें वैश्विक Y2K बूम का अवसर मिला था। इन्फोसिस को उन्होंने Rs.900/- में ख़रीदा था और Rs.11000/- में बेच दिया। इसके बाद रामदेव अग्रवाल मोबाइल व्यवसाय चलाने वाले एयरटेल के स्टॉक में अच्छा खाँसा लाभ कमाया

रामदेव अग्रवाल कि निवेश की रणनीति 

उन्होंने निवेशकों को मल्टी-बैगर स्टॉक खोजने के पांच नियम बताएं है।

(1) इक्विटी पर रिटर्न
स्टॉक के चुनने के लिए रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है। निवेशकों को न्यूनतम 20% ROE वाले कंपनी में ही निवेश करना चाहिए। निवेशक ऐसे ही स्टॉक चुनें जिसका ROE 20% आगे बढ़ता रहें।

(2) व्यापार की शर्तें
दूसरी चीज जो स्टॉक चुनने के लिए महत्वपूर्ण है वह है व्यापार की शर्तें। निवेशक को यह जानना जरुरी है कि कंपनी डिलीवरी या प्रीपेमेंट आधार पर नकदी के साथ उत्पाद का व्यापार करने में सक्षम है की नहीं। क्रेडिट अवधि उत्पादों की मांग और ताकत को इंडीकेट करती है।

(3) नकदी प्रवाह
अगला यह है कि कंपनी के कैश फ्लो को संचालित करने वाले नकदी प्रवाह की जाँच करें और कंपनी का फ्री कैश फ्लो सकारात्मक होना आवश्यक है। नकदी प्रवाह कंपनी की लाभप्रदता को इंडीकेट करता है। नकदी प्रवाह को जानने के लिए,  कंपनी के नकदी प्रवाह विवरण का अध्ययन करने की आवश्यकता है। 

(4) व्यवसाय की दीर्घायु
व्यवसाय की दीर्घायु की जाँच करें। व्यवसाय विकास की कहानी कब तक जारी रहेगी? अनुभव के आधार व्यवसाय के दीर्घायु की भविष्यवाणी जानना आवश्यक है। 

(5) प्रतियोगिता
जांचें कि कंपनी बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना करने में सक्षम होगी या नहीं। यदि कोई कंपनी अच्छा उत्पन्न कर रही है तो उसे बड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करने की संभावना है।

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