क्विक हील – कैलाश काटकर की सफलता की कहानी Quick Heal – Kailash Katkar Success Story

क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, एक भारतीय एंटीवायरस सॉफ्टवेयर और आईटी सुरक्षा सेवा कंपनी है, जिसका मुख्यालय पुणे, महाराष्ट्र में है। कंपनी को पहले CAT Computer Services (P) Ltd के नाम से जाना जाता था और साल 1995 में संस्थापक श्री कैलाश काटकर ने एक कंप्यूटर सेवा केंद्र के रूप में शुरू किया था। साल 2007 में कंपनी का नाम बदलकर Quick Heal Technologies Pvt Ltd. रखा गया। 

कंपनी उपभोक्ताओं, सर्वरों, क्लाउड कंप्यूटिंग वातावरण और छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए सुरक्षा सॉफ्टवेयर विकसित करती है। क्विक हील ने अपना खुद का सिक्योरिटी सूट, क्विक हील टोटल सिक्योरिटी विकसित किया है, जो बिटडिफ़ेंडर स्कैनिंग इंजन का उपयोग करता है। कैलाश काटकर यह कंपनी आज भारत में आईटी सुरक्षा सोलुशन के रिसर्च और विकास के अग्रदूतों में से एक है। इसके भारत में 31 शाखा कार्यालय और जापान, अमेरिका, केन्या और दुबई में वैश्विक कार्यालय हैं।

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कैलाश काटकर का प्रारंभिक जीवन 

कैलाश काटकर का जन्म महाराष्ट्र के रहमतपुर नामक एक छोटे से गाँव में एक महाराष्ट्रीयन परिवार में हुआ था। कैलाश के दो भाई बहन हैं संजय और आशा। बाद में उनका परिवार पुणे चला गया और उनके पिता फिलिप्स में मशीन सेटर के रूप में काम करने लगे। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। पढाई मे कैलाश की बचपन से ही कुछ खास दिलचस्पी नहीं थी लेकिन जैसे तैसे उन्होंने दसवीं क्लास तक की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद पढ़ाई छोड़ दी।

परिवार की आर्थिक मदद के लिए 10-11 वर्ष की आयु में ही पांचवी कक्षा की पढ़ाई के साथ वह स्क्रीन प्रिंटिंग का काम भी किया करते थे। बाद में टेक्निकल कामों में रुचि होने के कारण कैलाश ने रेडियो रिपेयरिंग का काम सीखा और अपने ही घर से लोगों के रेडियो रिपेयरिंग का काम करने लगे। जिसमें वह 1500 से ₹2000 तक कमा लेते थे।

कॅट कंप्यूटर सर्विसेज की स्थापना 

दसवीं क्लास की परीक्षा के बाद कैलाश ने पढाई छोड़ने का मन बना लिया और कुछ नई टेक्नोलॉजी सीखने के इरादे से एक लोकल रेडियो और केलकुलेटर रिपेयरिंग की दुकान पर नौकरी शुरू कर दी। जहां उन्हें मात्र ₹350 तनख्वाह मिलती थी। कम उम्र होने के कारण शुरुआत में दुकान की सफाई से लेकर चाय लाने तक के सभी काम उन्हीं से करवाए जाते थे। पर फिर भी उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के केलकुलेटर और अन्य ऑफिस उपकरणों की रिपेयर टेक्नोलॉजी सीखने के लिए यह सब काम किया।

24-25 वर्ष की उम्र तक कैलाश ने  उसी शॉप पर काम किया। काम के दौरान शॉप कि एक अन्य मुंबई ब्रांच में उनकी ट्रेनिंग भी हुई। इतने कुछ सालों में केलकुलेटर और रेडियो की रिपेयरिंग में मास्टरी के अलावा बिजनेस चलाने का अनुभव भी उन्होंने अच्छी तरह से हासिल किया। और साल 1990 में कैलाश ने किराए की एक छोटी सी दुकान में अपनी सेविंग के ₹15000 से खुद की केलकुलेटर रिपेयरिंग शॉप खुली। पहले साल ही उनको 45000 की कमाई हुई।

बदलते समय के साथ साथ कैलाश ने खुद को कंप्यूटर जैसी नई टेक्नोलॉजी में भी अपडेट करना शुरू कर दिया। साल 1993 उन्होंने कॅट कंप्यूटर सर्विसेज नाम से कंप्यूटर रिपेयर एंड मेंटेनेंस का काम भी शुरू कर दिया। कंप्यूटर मेंटिनेस में शुरुआत में थोड़ी सी दिक्कतें आई, परंतु धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मेहनत और परिश्रम से न्यू इंडिया इन्शुरंस जेसे कुछ कॉरपोरेट्स की एनुअल मेंटिनेस का काम लेने में कामयाबी हासिल की। जिसकी वजह से साल भर में उनके कंपनी की टर्नओवर एक लाख से ऊपर जा पहुंची।

क्विक हील का पहला एंटीवायरस टूल 

धीरे धीरे कॉम्पुटर का प्रचलन और लोकप्रियता बढ़ने के साथ उसमें फ्लॉपी वायरस की समस्या भी बढ़ने लगी। परंतु कैलाश के पास अपने कस्टमर के लिए वायरस की समस्या से निपटने के लिए फॉर्मेटिंग और रीइंस्टालिंग के स्टैंडर्ड सोलुशन के अलावा कोई टूल नही था। इसी दौरान धीरे-धीरे इंटरनेट की लोकप्रियता के साथ साथ इंटरनेट वायरस की समस्या भी बढने लगी और मार्केट में उपलब्ध एंटीवायरस सॉफ्टवेयर काफी महंगी थे।

इस समस्या से निपटने के लिए कैलाश काटकर कुछ सस्ता सोलूशन ढूँढना चाहते थे और इसीलिए उन्होंने अपने छोटे भाई संजय काटकर को जो पुणे में बीसीएस (बेच्लर ऑफ कंप्यूटर साइंस) की पढ़ाई कर रहे थे उनसे उन्होंने वायरस की समस्या के लिए कुछ टूल्स बनाने को कहा। अपने भाई की मदद के लिए संजय ने कड़ी मेहनत करके कैट कंप्यूटर सर्विसेज के लिए एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का एक बेसिक मॉडल तैयार किया। यह टूल काफी अच्छा काम भी करने लगा। कैलाश ने शुरुआत में अपने कस्टमर और कॉम्पिटिटर को यह सॉफ्टवेयर फ्री में देना शुरू किया और सभी को यह एंटीवायरस टूल बहुत पसंद भी आया।

क्विक हील एंटीवायरस सॉफ्टवेयर

उनके कस्टमर ने ही उनसे कहा कि आपका यह एंटीवायरस टूल एंटीवायरस सॉफ्टवेयर से भी अच्छा काम करता हैं। आपको खुद का एक एंटीवायरस सॉफ्टवेयर बनाना चाहिए। लोगों और कैलाश जी के प्रोत्साहन से उनके छोटे भाई संजय ने प्रॉपर एंटीवायरस सॉफ्टवेयर बनाना शुरू किया। साल 1995 में उन्होंने क्विक हील नाम से एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का पहला वर्जन मार्केट में लॉन्च किया। जिसका प्राइस मार्केट में उपलब्ध एंटीवायरस सॉफ्टवेयर से काफी कम था।

शुरुआत में सॉफ्टवेयर को मार्केट में बेचने में कुछ समस्याएं आई, लेकिन धीरे-धीरे सभी समस्याओं का हल निकालते हुए वे आगे बढ़ते गए। 1996-97 में उनकी टर्नओवर लगभग 1219000 तक जा पहुंची थी। अपने एंटीवायरस सॉफ्टवेयर के अच्छा होने के बावजूद मार्केट में अपने सॉफ्टवेयर के उपर लोगों का विश्वास बनाना और बेचना इतना आसान नहीं था। उस दौरान एक दौर तो ऐसा भी आया जब फाइनेंस प्रॉब्लम के चलते एक बार तो कैलाश ने कंपनी को बंद करने की सोची। फिर छोटे भाई संजय की सलाह पर कंपनी में कुछ मार्केटिंग प्रोफेशनल को कंपनी के साथ जोड़ा गया और उसके बाद उन्हें कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा।

क्विक हिल टेक्नोलॉजीस का तेजी से विस्तार 

क्विक हिल धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। क्विक हिल के बढ़ते कारोबार की जरूरत को देखते हुए वर्ष 2002 में 2500000 रुपए में 2000 स्क्वायर फीट का पहला ऑफिस पुणे में खरीदा गया। उसके साथ ही 2003 में नासिक में कंपनी का पहला ब्रांच ऑफिस भी खोला गया। उसके बाद देश की कई अन्य हिस्सों में भी ब्रांच ऑफिस खोलें गए। धीरे-धीरे कंपनी ने एंटीवायरस सोलुशन के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार शुरू कर दिया। जैसे कंप्यूटर स्पीड, मोबाइल सिक्योरिटी एंड गेटवे लेवेल प्रोटेक्शन आदि।

साल 2007 में कंपनी का नाम बदलकर क्विक हिल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड रखा गया। 2008 मे कंपनी की माइक्रोसॉफ्ट के साथ एक बडी डील हुई, जिसमे कंपनी माइक्रोसॉफ्ट का सर्टिफाइड पार्टनर बन गया। साल 2010 में कंपनी को सॉफ्टवेयर एंड मार्केट डेवलोपमेंट के लिए 60 करोड का लोन मिल गया और कंपनी ने अपने विस्तार के लिए विदेशों में भी अपने ऑफिस खोलने शुरू कर दिए।

आज क्विक हिल के 36 से ज्यादा शहरों में 1300 से ज्यादा एम्प्लॉई काम करते हैं। विश्व में लगभग 71 लाख एक्टिव लाइसेंस यूजर है। 100 से ज्यादा देशों में कस्टमर क्विक हिल को युज करते हैं। जापान, युएस, केनिया और यूएई मे क्विक हील के खुद के ऑफिस हैं। साथ ही देशभर में 20000 से ज्यादा चैनल पार्टनर, डिस्ट्रीब्यूटर रिटेलर भी है।

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