प्रोफेसर संजय बक्शी – फेमस वैल्यू इन्वेस्टर Professor Sanjay Bakshi – Famous Value Investor

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प्रोफेसर संजय बक्शी Professor Sanjay Bakshi

प्रोफेसर संजय बक्शी एमडीआई गुड़गांव में पढ़ानेवाले सबसे लोकप्रिय प्रोफेसर है। वहां वे एमबीए के छात्रों को “व्यवहार वित्त और व्यवसाय मूल्यांकन” पढ़ाते हैं। उनके कई छात्र आज फंड मैनेजर और इंवेस्टमेंट प्रोफेशनल हैं।

संजय बक्शी का प्रारंभिक जीवन Early Life of Sanjay Bakshi

संजय बक्शी स्कूल (DPS, मथुरा रोड) में पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे, एकमात्र गणित विषय उनको बहुत पसंद था। 1983 में, उन्होंने B.Com. करने के लिए किरोड़ीमल कॉलेज में प्रवेश किया। पढाई के दौराण लेखा, अर्थशास्त्र और कानून आदि विषयों में उनकी रूचि बढ़ गई।

कॉलेज खत्म करने के बाद, 1986 में संजय बक्शी ने Article Clerk के रूप में PriceWaterhouse Cooper ज्वाइन किया। तीन साल प्राइस वॉटरहाउस में निकालने के बाद लेखा, अर्थशास्त्र, कानून, वित्त, ऑडिटिंग जैसे विषय में उनकी रूचि बढ़ गई और उन्होंने Chatered Accountant की परीक्षा प्रथम प्रयास में ही उत्तीर्ण कर ली। इससे पहले कि उनकी 3 साल की आर्टिकलशिप पूरी होती संजय बक्शी को अमेरिकन एक्सप्रेस से नौकरी का प्रस्ताव मिला।

उन्होंने जून 1999 में American Express ज्वाइन कर लिया पर उन्हें वो नौकरी पसंद नहीं आई और दिसंबर 1999 उन्होंने नौकरी छोड़ दी। तभी वह बहुत मुसीबत में फंस गए क्योंकि उनके पास कोई दूसरा नौकरी का प्रस्ताव नहीं था। ऐसे ही जीवन में जब भी कभी उन्होंने बड़ा फैसला लिया वह ऐसे अचानक से ही लिया। उसके बाद उन्होंने ऑडिट अधिकारी के रूप में PWC वापस ज्वाइन किया।

प्रोफेसर संजय बक्शी की शेयर बाजार यात्रा Stock Market Journey of Professor Sanjay Bakshi

1990 की फरवरी में संजय बक्शी जी ने शादी कर ली। फिर, कुछ दिनों बाद ही उनको London School of Economics में एमएससी के लिए प्रवेश पत्र मिला जिसमें शुल्क का भुगतान करने के लिए Scholarship भी दी गई थी। पत्र मिलते ही प्रोफेसर संजय बक्शी अपनी पत्नी के साथ 1990 के सितंबर में लंडन पहुंचे और अपनी पढ़ाई पूरी करने में जुट गए। उस समय रहने, खाने का खर्चा चलाने के लिए दोनों पति पत्नी बर्गर किंग में पार्ट टाइम जॉब भी करते थे। उनका शुरुवात की जीवन बहुत हालांकि के साथ गुजरा पर उन्होंने हार नहीं मानी।

एक साल LSE में कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने Financial Times में वॉरेन बफेट का लिखा एक आर्टिकल पढ़ा, जिससे वे बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने भारत में जाके इन्वेस्टमेंट करने का फैसला लिया। उनको पता चला कि वॉरेन बफेट अपने शेयरहोल्डर के लिए हर साल ऐसे अच्छे वार्षिक रिपोर्ट लिखते है तो उन्होंने वह सारे वार्षिक रिपोर्ट पढ़ना शुरू किया और जिससे उन्हें Value Investing में रूचि आई और उन्होंने वैल्यू इन्वेस्टिंग सीखने के लिए लंडन में कुछ साल और रहने का फैसला किया।

प्रोफेसर संजय बक्शी की निवेश की रणनीति Investment Strategy of Professor Sanjay Bakshi

कुल साढ़े तीन साल लंडन में रहने के बाद संजय बक्शी अपनी पत्नी के साथ भारत वापस आए। भारत वापस आने के बाद उन्होंने अपनी 3 लाख रुपये की सेविंग से कंपनी स्थापित की जिसमे उनके अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों ने भी पैसा लगाया और जिससे उन्होंने मार्केट में इन्वेस्टमेंट करना शुरु किया। 1996 तक, उनका पैसा 40% तक डाउन गया था पर फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी गलतियों को ठीक करके Benjamin Graham की सलाहनुसार अपने पोर्टफोलियो को फिर से बनाया। शुरुआत में वे बिज़नेस की क्वालिटी को जाने बिना सिर्फ वैल्यूएशन पे जोर देते थे जिससे उन्होंने कई कंपनियों से जल्दी एग्जिट कर लिया पर बाद में उन्होंने अपनी गलतियों से सीखकर बिज़नेस क्वालिटी और मैनेजमेंट क्वालिटी पे भी जोर दिया और उसके के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

संजय बक्शी कहते है Value Investing में प्रैक्टिस बहुत महत्त्वपूर्ण है, जो चीजे आप सीखते हो उन्हें आपको लागू भी करना पड़ता है। प्रोफेसर बक्शी पढ़ना बहुत पसंद करते है, वो हर दिन 6-7 घंटा पढ़ते है। साथ ही फंडू प्रोफेसर नामक ब्लॉग भी चलाते है आज वे आर्थिक रूप से पूर्णतः स्वतंत्र है। उन्होंने अपने सभी ग्राहकों को छोड़ दिया है। एमडीआई से जो पैसा उनको मिलता है, वह उनकी इन्वेस्टमेंट की कमाई के 1% से भी कम है। यानि कि रॉबर्ट कीयोसाकी (रिच डैड पुअर डैड के लेखक) के कहावत के अनुसार अब वे पैसे के लिए काम नहीं करते बल्कि पैसा उनके लिए काम करता है। आज वह Value Quest Capital LLP के मैनेजिंग पार्टनर और वो Value Quest India moat fund को भी संभालते है।

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