मेक माय ट्रिप – दीप कालरा की सफलता की कहानी MakeMyTrip – Deep Kalra success story

मेक माय ट्रिप  MakeMyTrip

मेक माय ट्रिप एक भारतीय ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी है। इसकी शुरुआत संस्थापक दीप कालरा ने साल 2000 में की थी। ऑनलाइन टिकट बुकिंग सेगमेंट में आज यह भारत की अग्रणी ट्रैवल कंपनी बन गई है। MakeMy Trip कंपनी फ्लाइट टिकट, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय हॉलिडे पैकेज, होटल आरक्षण, रेल, और बस टिकट सहित ऑनलाइन यात्रा सेवाएं प्रदान करती है।

31 मार्च 2018 तक, उनके पास 14 शहरों में 14 यात्रा स्टोर और 28 शहरों में 30 से अधिक फ्रेंचाइजी यात्रा स्टोर थे, इसके अलावा भारत में चार प्रमुख एयरपोर्ट में उनके काउंटर भी हैं। MakeMyTrip के न्यूयॉर्क, सिंगापुर, कुआलालंपुर, फुकेट, बैंकॉक और दुबई में कार्यालय हैं। आज हम इस कहानी के माध्यम से मेक माय ट्रिप के संस्थापक और सीईओ दीप कालरा की सफलता की कहानी जानने की कोशिश करेंगे।

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दीप कालरा का प्रारंभिक जीवन  Deep Kalra’s early life

दीप कालरा का जन्म हैदराबाद में हुआ। साल 1987 में उन्होंने दिल्ली के स्टीफन कॉलेज से अर्थशास्त्र में डिग्री प्राप्त करने के बाद एमबीए करने के लिए वह IIM अहमदाबाद गए। एमबीए पूरा करने के बाद उन्होंने ABN AMRO बैंक में की नौकरी की। तीन साल एबीएन एमरो नौकरी करने के बाद साल 1995 में इंटरनेट पर ऑनलाइन सेवाओं में कुछ बड़ा करने की इच्छा से दीप ने नौकरी छोड़ दी।

लगभग एक साल ब्रेक लेने के बाद अमेरिकास्थित AMF bowling कंपनी जॉइन की, जो उस समय भारत में अपना व्यवसाय बढ़ाने की कोशिश कर रह थी। जल्द ही उन्होंने कंपनी की 200 लेनें स्थापित की। यह दीप कालरा के लिए एक महान उद्यमशीलता का अनुभव था। लेकिन चार साल बाद एक बड़ी वित्तीय आपदा के कारण दीप ने कंपनी छोड़ दी और साल 1999 में जीई कैपिटल में व्यवसाय विकास का काम संभाला। लेकिन कुछ बड़ा करने के इच्छा ने यहाँ पे भी उन्हें शांत बैठने ने नहीं दिया, इसी दौरान उन्हें इंटरनेट की शक्ति पता चला।

मेक माय ट्रिप की शुरुआत  Beginning of Make My Trip

उस समय भारत में यात्रा करना बहुत ही कठिन था, और ट्रैवल सेगमेंट में प्रवेश करके लोगों को ई-कॉमर्स के माध्यम से मुक्त सेवाएं प्रदान करना बड़ा ही मुश्किल था, क्योंकि लोगों के लिए यह एक नई सोच के बराबर था। फिर भी दीप कालरा ने साल 2000 में “मेक माय ट्रिप” को व्यवसाय मॉडल के रुप में पेश किया। हालाँकि, डॉट कॉम बबल के बाद प्राइवेट फण्डहाउस ने उन्हें $ 1,000,000 से फंडिंग करने से साफ़ इनकार कर दिया, जिसकी वजह से कंपनी की आर्थिक हालत काफी ख़राब हो गई।

एक समय ऐसा भी आया कि जब कंपनी के दो वरिष्ठ प्रबंधकों ने व्यापार में अपनी इक्विटी को वापस ले लिया और फिर पैसों की तंगी की वजह से दीप को अपने कर्मचारीयों की संख्या को आधा करना पड़ा था। साथ ही उन्हें make my trip में अगले 18 महीनों के लिए अपने साथियों के साथ बिना सैलरी के ही काम करना पड़ा। जैसे-जैसे समय बीतता गया कंपनी की स्थिति बेहतर होती गई और साल 2005 तक मेक माय ट्रिप सफलता की और आगे बढ़ने लगी।

मेक माय ट्रिप का विकास  Growth of Make My Trip

उसी वर्ष भारतीय रेल्वे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग सेवाएं शुरू की, जो यात्रियों के लिए नया सकारात्मक बदलाव था। इसके अलावा कम लागत वाले कैर्रिएर्स कंपनियों ने भी भारतीय विमानन क्षेत्र में प्रवेश किया था, इन घटनाओं की श्रृंखला ने भारतीय बाजार में यात्रा कंपनियों को व्यवसाय वृद्धि के लिए और भी बढ़ावा मिला, जिसकी वजह मेक माय ट्रिप ने होटल बुकिंग के साथ रेल टिकट, हॉलिडे पैकेज बुकिंग भी शुरू कर दिया।

आईआरसीटीसी ऑनलाइन टिकट बुकिंग सेवाओं ने मेक माय ट्रिप को न केवल भारतीय यात्रा बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद की बल्कि उसे यात्रा कंपनियों में शीर्ष पे पहुँचा दिया। जल्द ही कंपनी ने अच्छी कमाई करना शुरू कर दिया। उस समय भारत में प्रत्येक 12 घरेलू उड़ानों में से एक उड़ान मेक माय ट्रिप की तरफ से बुक किया जाता था, और इस तरह कंपनी ने एक वर्ष के भीतर 200,000 ख़ुशहाल ग्राहकों का अपने साथ जोड़ दिया।

जब 2008 में दुनिया मंदी की स्थिति में थी, मेक माय ट्रिप ने उसी वर्ष अपने हजार करोड़ मूल्यांकन को पार कर लिया था। इसके अलावा 500 मिलियन डॉलर ग्रॉस रिवेन्यू के साथ 5 मिलियन डॉलर का मुनाफा भी दर्ज किया। जल्द ही कंपनी ने अपने मौजूदा प्रोफाइल बढ़ाने के लिए, अपनी मल्टी-सिटी फ्लाइट बुकिंग सेवाएं शुरू की, चौपर चालित ऑनलाइन कैब किराये की सेवाओं को जोड़ा। साथ ही मोबाइल डिवाइस के लिए यात्रा संबंधी कई ऐप बनाये।

NASDAQ पर लिस्टिंग  Listing on NASDAQ

अगस्त 2010 में मेक माय ट्रिप पहली भारतीय यात्रा कंपनी थी, जो NASDAQ पर लिस्टिंग हो गई । जिस वजह से विदेशी निवेशकों को भारतीय कारोबार में निवेश करना सुलभ हो गया। इस घटना से न केवल भारत के आईटी क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला, साथ ही युवा उद्यमियों का आत्मविश्वास भी बढ़ने लगा और कई सारे नए स्टार्टअप में जन्म लेना शुरू किया।

उस वक़्त मेक माय ट्रिप ने अपना सारा लक्ष्य मुख्य रूप से विस्तार और रेवेन्यू बढ़ाने पर केंद्रित किया। कई बार वास्तविक व्यवसाय बनाने के लिए आजीवन लग जाता है, लेकिन दीप कालरा ने एक दशक से भी अधिक समय तक अपने व्यवसाय में पूर्ण समर्पण दे कर, आज मेक माय ट्रिप को इस मुकाम तक पहुँचाया है। वह कहते है, कि आज कंपनी को इस स्तर तक पहुँचने के लिए, उन्होंने अपनी हिस्से की समस्याओं का सामना किया है, वह अपनी बहादुरी से रास्ते में आई बाधाओं का सामना करके अपनी पहुँच से आगे बढ़ने में काफी सफल रहे है ।

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