बुक माय शो – असफलता से लेकर मल्टी मिलियन डॉलर बनाने तक Book My Show – From Failure to Making Multi Million Dollars

बुक माय शो के बारे में  About BookMyShow

बुक माय शो, भारत का सबसे बड़ा मनोरंजन टिकट प्लेटफॉर्म है। इसकी शुरुआत 1999 में मूवी थिएटरों के लिए एक सॉफ्टवेयर री-सेलर के रूप में हुई और बाद में यह क्लाउड-आधारित इवेंट्स, मूवीज, स्पोर्ट्स और प्ले बुकिंग्स के सेवाएं देनेवाले प्लेटफॉर्म में परिवर्तित हो गया। शुरुआत में BookMyShow को इसकी मूल कंपनी, Bigtree Entertainment Pvt Ltd के नाम से जाना जाता था।

कंपनी ने 5 देशों में 30 मिलियन से अधिक ग्राहक अपने साथ जोड़े है। इसकी शुरुआत संस्थापक आशीष हेमराजानी ने Rs.25000 के प्रारंभिक पूंजी साथ की थी और वित्त वर्ष 2018 में कंपनी Rs.391 crore का ग्रॉस रेवेन्यु जेनरेट करने में कामयाब रही है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग उद्योग में कंपनी की लगभग 90% बाजार हिस्सेदारी है। BookMyShow का वर्तमान मूल्य लगभग 850 मिलियन डॉलर है।

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                            BookMyShow Founder Ashish Hemrajani

बुक माय शो की शुरुआती यात्रा  Starting Journey of Book My Show

आशीष हेमराजानी की यह यात्रा वर्ष 1999 में शुरू हुई, जब वे दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर गए। उस समय अपना MBA पूरा करने के बाद वह J. Walter Thompson नामक एक विज्ञापन फर्म के लिए काम कर रहे थे। इस यात्रा ने उनकी जिंदगी बदल दी। वह एक पेड़ के नीचे बैठकर रेडियो पर रग्बी टिकट का प्रचार सुन रहे थे, तभी उनके मन में अचानक से टिकट बेचने का विचार आया। आशीष ने अच्छी तरह से रिसर्च करके बाजार को समझा और उसपर एक रणनीति बनाई। फिर भारत लौटने के बाद , उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर व्यवसाय करने के बारे में सोचा।

आशीष ने 24 साल की उम्र में ही खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया और “Bigtree Entertainment Pvt” के नाम से अपना पहला इंटरनेट उद्यम लॉन्च किया। जिसकी शुरुआत उन्होंने अपने घर के बैडरूम से की। इसके तुरंत बाद, उन्होंने अपने दोस्तों राजेश बालपांडे और परीक्षित दार जो उनके साथ मुंबई विश्वविद्यालय के सिडेनहैम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में पढ़ते थे। उनको भी कंपनी में अपने साथ काम करने के लिए मना लिया। परीक्षित टेक्नोलॉजी संभालने लगे और राजेश ने वित्त संभाला। जल्द ही तीनों उद्यमियों ने एक साथ मिलकर बिगट्री एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड में अपनी यात्रा की शुरुआत की और कंपनी का आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया।

फंडिंग और निवेशक  Funding And Investors

उस समय बुक माय शो के पास सीमित नकदी थी, इसलिए उन्होंने निवेशकों से संपर्क करना शुरू कर दिया। अपने व्यवसाय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देखने के बाद, उन्हें अपना पहला निवेशक JP Morgan Chase मिला। कंपनी ने फ़ैक्स के माध्यम से अपना प्रस्ताव भेजकर JP Morgan Chase से INR 2.5 करोड़ का निधि प्राप्त किया। कंपनी ने केवल एक पेज फैक्स के माध्यम से बिज़नेस मॉडल बताते हुए, अपने पहले निवेशक का आश्वस्त किया था। उसके बाद, बुक माय शो ने “गो टिकटिंग” के ब्रांड नाम के तहत अपना उद्यम शुरू किया, जिसे बाद में उन्होंने 2002 में “इंडिया टिकटिंग” के रूप में फिर से ब्रांडेड किया, जिसे अंततः “बुकमायशो” कहा गया।

चुनौतियां  Challenges

साल 2002 का dot com bubble बुक माय शो के लिए कठिन रहा। उस समय, बिना क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग का अभाव, खराब ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और सिनेमाघरों में ई-टिकटिंग सॉफ्टवेयर की कमी के कारण ऑनलाइन टिकट बेचना आसान काम नहीं था। एक समय ऐसा था जब बुक माय शो बल्क में टिकट खरीदता था और ग्राहकों तक टिकट पहुंचाने के लिए सैकड़ों लोगों को बाइक पर भेजता था। हालाँकि, यह व्यवसाय मॉडल स्केलेबल नहीं रहा  और कंपनी को इसे बंद करना पड़ा।

शुरुआती दिनों में, बुक माय शो मुख्य रूप से अपने व्यवसाय को ऑफ़लाइन कर रहा थी। इसमें 150 कर्मचारियों के साथ 12 शहरों में 12 कॉल सेंटर थे और कंपनी इन सभी बाधाओं के बावजूद अच्छा काम कर रही थी। लेकिन कंपनी के कैपिटल पार्टनर चेस, ने Rupert Murdoch’s News Corp को अपनी हिस्सेदारी बेच दी, उस समय डॉट कॉम दुर्घटना में   कारोबार मंदी में चल रहा था। इसकी वजह से निवेशक पीछे हट गए और BookMyShow को News Corp से अपना कारोबार वापस खरीदना पड़ा।

संकट के प्रभाव को कम करने के लिए, बुक माय शो ने कर्मचारियों के वेतन और प्रमुख खर्चों में कटौती की। इसने कुछ कार्यालयों को बंद कर दिया और केवल प्रमुख शहर मुंबई और दिल्ली पर ही अपना ध्यान केंद्रित किया। कंपनी ने अपनी कर्मचारियों की संख्या 150 से 6 सदस्यों तक कम कर दी। लेकिन आशीष, परीक्षित, और राजेश ने इन प्रतिकूल परिस्थिती के बावजूद भी हार नहीं मानी।

तेजी से विस्तार  Rapid Expansion

डॉट कॉम सुनामी के जाने के बाद, भारत में बेहतर इंटरनेट सुविधाओं, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड सुविधाओं और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बाजार पूरी तरह से बदल गया। 2002 और 2004 के बीच, भारत भर में मल्टीप्लेक्स की संख्या में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई। बुक माय शो अपने मजबूत मुकाम को वापस पाना चाहती थी। इसने मल्टीप्लेक्स को स्वचालित टिकटिंग सॉफ्टवेयर प्रदान करते हुए सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन बेचना शुरू किया। कंपनी ने अपने ग्राहकों के लिए कॉल सेंटर चलाना भी शुरू कर दिया। कंपनी धीरे-धीरे मंदी से उभरकर आगे आई और 2007 में INR 24.1 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया।

इस बदले हुए वातावरण ने बुक माय शो को अपना व्यवसाय बढ़ाने में काफी मदद की उन्होंने नए निवेशकों से संपर्क करना शुरू कर दिया और आखिरकार मार्च 2007 में Network 18 ने बुक माय शो में INR 14.5 करोड़ का निवेश करने के साथ व्यवसाय में 60% हिस्सेदारी खरीद ली। जल्द ही कंपनी ने अपना व्यवसाय विस्तार करने के लिए अपने बंद हुए कार्यालयों को वापस शुरू कर दिया। हर जगह अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए नए स्टोर भी चालू कर दिए। साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान जब सब जगह मंदी का माहौल था उस वक़्त भी कंपनी ने अपने प्रतिभाशाली कर्मचारियों के आधार पर अच्छा प्रदर्शन किया।

अचीवमेंट्स और पुरस्कार  Achievements and Awards

अपने अच्छे प्रदर्शन के लिए बुक माय शो को “The Hottest Company of the Year-2011-12” से सम्मानित किया गया। बाद में 2013 में, कंपनी ने PVR Cinemas के साथ पांच साल की रणनीतिक साझेदारी सौदे पर हस्ताक्षर किया, जिसमें उनके 1500+ सिनेमाघरों में 250 नए सिनेमा स्क्रीन जोड़े गए, जो वर्तमान में 200 लोगों और 150 आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा चलाए जाते हैं। साल 2014 में, SAIF Partner ने बुक माय शो में INR 150 करोड़ का  निवेश किया, जिसके बाद कंपनी 200 से ज्यादा शहरों में अपने स्टोर चालू कर दिए।

वर्तमान में, ऑनलाइन टिकट बुकिंग उद्योग में बुक माय शो मार्केट लीडर बन गया है। कंपनी अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से सेवाएं प्रदान कर रही है। उन्होंने अपना सबसे पहला ऍप 2012 में लॉन्च किया था। कंपनी प्रति माह 15 मिलियन से भी ज्यादा टिकट बेचती है, इसके अलावा BookMyShow प्रति माह 500 मिलियन पेज व्यूज के साथ विज्ञापनों के माध्यम से $ 100,406 मासिक रेवेन्यु कमाती है।

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